आज नये साल का दुसरा दिन है 2 जनवरी 2019 और रात के करीब 10 बजे है और मेरी सोच समाज के प्रीती नकारत्मक हो गयी है कारन शायद निजी है लेकिन वक्त बदलता है तौ सब कुछ बदल जाता है ।
मेरी शादी हुई करीब 24 साल पूर्व पत्नी मिली अच्छी तब के मुताबिक लेकिन समय बीतने के साथ उसकी सोच भी बदल गयी और समाज मे जो चौका चौंध है उस से वह भी अछूती नही रही। शादी के एक साल बाद ही बेटा पैदा हुया जिसकी देख रेख मे हम से चूक हुई हमारी माताजी ने जो उनको करना चाहिये थे वह उन्होने नही किया यहं तक मैने उसे डॉक्टर को दिखाने को कहा जो की नही दिखाया नतीजा उसको हमने खो दिया मुझे बहुत गुस्सा आया अपनी माताजी पर और मैने उनसे बोलना छोड दिया इसके बाद मेरी एक बेटी पैदा हुई मैने भी कॉलेज की चार किताबे पढी थी सो लड़का लड्की का भेद भूल गया था इसके बाद मैने एक अच्छा मौहाल उस बेटी को दिया और इंग्लिश मीडियम मे पढाया उसकी हर खवाहिस पूरी की समय बीतता गया और उसने 10वी 12वी और बीएससी पास की मैने पहले दिन से आज तक काफी पैसे खर्च किये और कभी किसी के आगे हाथ भी नहीं फैलाया और उसे एक प्रोफ़ेशनल कोर्स कर वाया बाद में वह भी खत्म हो गया और बारी आयी कमाने की उसको वही पर जॉब मिली जहा से उसने कोर्स किया हॉस्टल मे रहने के कारन उसके अंदर परिवर्तन आया लेट नाइट तक फ़ोन पर बाते करना दोस्तो के साथ घूमने जाना फिल्म देखना आदि आदि शौक हो गये हम ठहरे गांव के गावर हमे यह सब देख कर घूटन होने लगी हमने रोका टाकी की तो उसे बुरा लगने लगा और उसने हमारी बात मानने से इन्कार कर दिया जी । जिन्दगी मे मेरी सोच औरत के प्रीति बदल ने पर मजबूर करने वाली घटनाए दस्तक दे रही है मै सोचता था कि समाज मे जो भेद देखने को मिलता है मै ऐसा नही करूँगा लेकिन बचपन मे जो प्यार भाई बहन के बीच रह्ता है उसे भी शादी के बाद तोड देती है वह चाहे बहन हो, या पत्नी, माँ जिसे हमारे समाज मे बड़ा स्थान दिया है मेरे साथ उस माँ का दोहरा चरित्र रहा है रही सही कसर उस बेटी ने पूरी की जिसे मैने अपनी जान से ज्यादा पाला पोशा आज उसकी जिन्दगी मे मेरी लिये कोई जगह नही है उसे अपने से ही मतलब है ऐसे मे कैसे कोई आदमी अपनी राय बदलता है मेरी इस कहानी से आप अंदाजा लगाये की एक आदमी जिसके साथ उसकी माँ, बहन, पत्नी और अन्त मे बेटी का भी उसकी निजी जीवन मे कोई अच्छा प्रभाव नही दिखता।